उच्च शिक्षा के लिए पलायन कर रहे भारतीय छात्र जहाँ अपने अच्छे भविष्य के लिए विकसित देशों का रुख करते है, इनकी प्राथमिकता अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देश होते हैं.विदेश जाने वाले विद्यार्थियों में ८१ प्रतिशत का पसंदीदा देश अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया हैं . ज्ञातब्य है की मंदी के दौर में इन देशों की लडखडाती हुई अर्थब्य्वस्थाओं में इनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है ,इनपर हो रहे नस्लभेदी टिपण्णी और रेडियो कौलर जैसे मामले इनके दर्द को बयां करते है इसके अलावे कई तरह के दंश झेलते हैं ये छात्र !
ऑस्ट्रेलिया में नस्लभेदी टिपण्णी का बाद अमेरिका के कैलिफोर्निया में ट्राई वैली नाम के फ़र्ज़ी विश्वविद्यालय ने अपने कॉलेजों में दाखिला लेने वाले भारतीय छात्रों के पैरो में बेड़ीनुमा रेडियो कौलर डाल दिए गए ताकि उनकी गतिविधियों की सुचना अमेरिकी पुलिस को मिलती रहे .अमेरिका जहाँ विश्वपटल पर मानव अधिकार की बात करता फिरता है और अपने ही देश में इसका खुला हनन कर रहा है .अमेरिका ही नहीं बल्कि और भी ऐसे देश है तमाम तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता है . भारत में अब मध्यमवर्गीय परिवार का भी सपना होता है की हमारे बच्चे विदेशों से शिक्षा ग्रहण करें लेकिन इस तरह की घटनाएँ लोगो में डर पैदा कर देती हैं.