Tuesday, January 8, 2013

यादों के साये में जिंदगी का धुंधलापन

यादें हीं याद आती हैं !!!!!!!!!!


कहते हैं यादें जिंदगी  के अहम् हिस्सों में से एक है पर कभी- कभी यादें गहरे जख्म को ताजा कर देती हैं .ये सही  भी है ।वक्त कब किस ओर और कहाँ ले जाएगा ये कौन जानता है ? हर कोई अच्छी जिंदगी के बारे में हीं सोचता है पर भला वक्त और यादों पर किसका वश होता है ।यादें हंसाती हैं भी हैं और रुलाती भी।यादें सपनें की तरह होते हैं जो कई पहलुओं को पल भर में छू जाते हैं ।


आजकल मेरे मन में दुविधाओं का सैलाब उमड़ पड़ा है । एक अजीब सा बदलाव महसूस कर रहा हूँ । शायद अकेलेपन की आदत पड़ती जा रही है । कितना अंतर हो गया है पहले और आज में । मैं परिस्थतियों को संभालने की कोशिश कर रहा हूँ। मेरी इन परिस्थितयों से बहुत लोग नाराज होंगे पर क्या करुँ  किससे बताऊँ समझ में नही आता पर समझेगा कौन अपनी परेशानियों को बतानें से क्या फायदा ये सभी प्रश्न मन को विचलित करते हैं। मैं कुछ यादों से उबरना चाहता हूँ जो अच्छी भी हैं बूरी भी। हर परेशानियों को अपने से उबरना पड़ता है हाँ सही भी है कुछ लोग इसे पागलपन भी कह सकते हैं पर अपनी मन: स्थिति को किसी ब्यक्ति से ज्यादा कौन जान सकता है यूँ तो बदलाव के कई कारण भी हो सकते हैं। मैं चाह कर भी कई पलों को नहीं भूल नहीं सकता फिर भी कोशिश करनें में भला क्या हर्ज है ।जिंदगी में कई ऐसे मौके आए जिनके तरफ हम बरबस हीं खींचे चले जाते हैं ।समझ में नहीं आता यादों में जिंदगी है या जिंदगी में यादें !