Thursday, June 26, 2014

आखिर किस हाशिये पर खड़ी है राजनीति ?

बयानबाजी को दौर इस कदर जारी है मानो पार्टियों के नेता महाभारत के युद्ध की तरह तीरों की बरसात कर  रहे हों, नेतागणों के जुबान फिसलते जा रहे हैं। बातों के इस युद्ध में इन बातों का ख्याल बिल्कुल भूल जा रहे हैं कि इससे लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचेगा कि नहीं।


 देश को जाति,धर्म, संप्रदाय, क्षेत्र, लिंग के आधार पर बांटकर कब तक वोटों को हासिल करने की राजनीति की जाती रहेगी। यह नफरत एक दूसरे के प्रति क्यों पैदा की जा रही है। अगर वोट बैंक बनाने के खातिर देश के आस्तित्व पर खतरा मंड़राने लगे तो यह हमारे जैसे लोकतंत्र के लिए यह कहां तक न्यायोचित है, देश की जनता जागरुक हो चुकी है, उसे निर्णय लेने आता है। 

कुछ ऐसे अटपटे बयानों से देश में जैसे भूचाल सा आ गया लोग सिर्फ टकटकी भरी निगाहों से समाचार देखते नजर आ रहें मानों हमारे जनप्रतिनिधियों को क्या हो गया है वे इतने उलझे हुए बयान क्यों दे रहे हैं,क्या यह सिर्फ व सिर्फ वोट के लिए है तो यह बेहद हीं कठिन समय है जब भारतीय लोकतंत्र को ये भी है दिन देखने पड़ रहे हैं।

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