Monday, July 9, 2012

कितने अजीब रिस्ते हैं यहां पर .....


मेरे अजीज मित्र नें एक बात कही थी कि नजरों से दूर दिल से दूर लेकिन मैं इससे सहमत नहीं था हालांकि ये बातें उसने मेरे लिए नहीं कही थी । पर शायद आज मैं भी इससे इत्तेफाक नहीं रख पा रहा । कभी दोस्ती और प्यार जैसे रिस्ते पवित्र माने जाते थे । जहां एक दूसरे के भावनाओं का कद्र करना बहुत हीं महत्व रखता था। कई कहानियों और कथाओं में भी इसका मिशाल दिया गया है । यह बंधन नहीं बल्कि मजाक मजाक में कह देनें वाली बात बन कर रह गया है । मैंने दिल से जुड़कर भी देख लिया जिसको भी दिल से चाहा उसने मेरे भावनाओं का मजाक बनाया।

मैनें रिस्तों को बहुत प्यार से निभाया पर
    कुछ लोगों ने इसे खुब भुनाया
    किसी नें हँसाया तो किसी ने खूब रुलाया
जिसने वादा किया जिंदगी भर दोस्ती निभानें का उसी ने गम दिया जमानें का ।
सच्चे रिस्तों को समझना भी बहुत मुश्किल होता है और ज्यादा जज्बाती होना भी अच्छा नहीं माना जाता है लेकिन जिंदगी में कुछ ऐसे रिस्ते होते हैं जिसे सच्चाई के साथ निभाना पड़ता है । ऐसा नहीं होता कि सभी लोग दर्द हीं दे कोई तो होगा जो हमारी भावनाओं को समझ सकेगा ।दोस्त हमारी जिंदगी के तमाम पहलुओं से अवगत होते हैं ।जब एक- दुसरे से बातें छुपायी जानें लगे तो रिस्तों के समाप्त होंने का समय आ जाता है ।कहीं न कहीं कमजोर हो रहे रिस्ते कि निशानी है ये ।