Monday, December 17, 2012

डर लगता है !!!!


ऊँघती हुई परछाईं से डर लगता है,
वक्त की अंगड़ाई से डर लगता है

     राह में न जाने कितनें हैं काँटे,
     अब तो फूलों की रुसवाई से डर लगता है

गैर तो गैर हीं सही,
अब तो अपनें और पराये के साये से डर लगता है

     मौसम तो बेवक्त बदलते रहते हैं
     अब तो बिन बादल बरसात से डर लगता है ,

माना बेवफाई बहुत दर्द देती है हमें
अब तो प्यार और दोस्ती के खाईं से डर लगता है

     दिल में प्यार बहुत है अपनों के लिए,
  अब तो रिश्तों के गहराई से डर लगता है !!!!

                        अमिताभ गुंजन

Monday, December 10, 2012

अपनापन का दर्द !!!!

अजीब कशमकश सी है आज दिल में ! पता नहीं मेरी बेचैनी कुछ ज्यादा ही बढ़ती जा रही है मैं  उलझनों में जी रहा हूँ मुझे भी पता नहीं आखिर क्यों मैं इतना उदास हूँ  ?   इस उदासी और बेचैनी के वजह कहीं मेरे अपनें तो नहीं ।

कहते हैं कि हमें अपनें हीं दर्द देते हैं ,हम अपनों से हीं हार जाते हैं अपनापन का मतलब सिर्फ खुन के रिस्ते से हीं नहीं बल्कि जिसे हम दिल से चाहते हैं और हमेशा अपना मानते हैं आखिर वो भी तो अपना हीं है ।लेकिन सही तौर पर देखा जाए तो ये कहना बेहद मुश्किल है कि अपना है कौन ?



यह कहना बेहद आसान सा लगता है तुम मेरे सच्चे दोस्त हो और जिंदगी भर दोस्ती निभानें का वादा भी कर लिया जाता है । अगर किसी से नजदिकियां बनाओ तो वो दूरी बनाना चाहता है लेकिन इस ब्यावसायिक युग में आपका अपना भला कौन हो सकता है ! अगर आपको उससे फायदा नहीं तो वो आपसे दोस्ती क्यों करेगा ? सही मायनों में अपना वहीं है जो आपके भावनाओं दुख-दर्द को महसुस कर सके। जब आप परेशान हो तो आपकी परेशानियों को समझे ।ऐसा मिलना संभव नहीं होता  । जल्दबाजी में हम किसी को अपनें दिल की बातें बता देते है बाद में वहीं ब्यक्ति हमारी भावनाओं को ठेस पहुँचानें में कोई कसर नहीं छोड़ता ।क्या सिर्फ अपना कहना ही दोस्ती की सच्ची निशानी है, दोस्ती और अपनापन के कोई अपने फर्ज भी होते है जिसे निभाने की जरुरत होती है । हम जिसे भी अपना समझते हैं उससे कुछ ज्यादा हीं उम्मीदें लगा बैठते हैं और सबसे अधिक ठेस वहीं पहुँचाते हैं ।
  
मैंने बहुत लोगों को अपना बनाने की कोशिश भी की सब ने दिखावापन के सिवा कुछ नहीं दिया । मेरी भी गलती होती है उन्हे बहुत जल्द अपना बना लेता हुँ । किस तरह के लोग होते हैं मुझे ये नहीं पता पर शायद इनके लिए आसान होता है रिस्तों को तोड़ना । कभी न कभी उन्हें एहसास होगा अपनापन का दर्द ।  
 

Monday, November 5, 2012

OMG !!!!!!!!!!! आस्था का ये कैसा आडंबर..........




आस्था में सच्चाई होती है ये मैं नहीं जानता, क्योंकि मैं कर्म पर विश्वास करता हूँ खैर जिस भगवान का आस्तित्व हीं नहीं उसे हम मुर्तियों में ढ़ूँढते  हैं आखिर क्यों धर्म के पाखंडियों को बढावा दिया जाता है ? जिस पर हमारा भरोसा नहीं होता हम मन्नते मांगते फिरते हैं अगर मन्नते पूरी तो भगवान ने कर दिया और पूरी नहीं किया तो किसी दूसरे भगवान के दरवाजे पर दस्तक देते हैं ।कहीं न कहीं हम उनकी पुजा ड़र से करते हैं मेरे साथ बुरा न हो जाए।
जो किसी के साथ बुरा करते है और भगवान से दुआ करते हैं कि वो उनके गलतियों को माफ़ कर दे ,पर ये कैसा भगवान है कि माफ कर दे
कहीं लोग मर रहे हैं और आसमान से फुलों की बारिश किया जाए यह कैसा इंसाफ ।कहीं बम धमाकों में हजारों लोग मरते हैं अगर भगवान होता तो चुपचाप नहीं देखता । इन प्रश्नों को ΟΗ ΜΥ God मूवी में बखूबी से  उठाया गया है . क्या भगवान  का फर्ज इतना ही है कि वे  सिर्फ देखते रहें  यहाँ इंसानियत का गला घोटा जा रहा है।आस्था के नाम पर लोगों को मुर्ख बनाने वाले बाबा  लाखों का ब्यवसाय करते नजर आते हैं .

OH My God  Plese अगर तुम जिंदा हो तेरा आस्तित्व है तो इंसाफ करो !!

Friday, August 10, 2012

किसी से ज्यादा उम्मीदें तो ही दर्द देती हैं ! ! ! !


जिंदगी का हर एक भाग सीख हीं तो है !!!!!


कभी - कभी जिंदगी पहेली सी लगती है न जाने हम क्यों इससे ज्यादा उम्मीद रखते हैं ,हो भी क्यों नहीं हम इसे अच्छे तरीके से जीना पसंद करते हैं, कुछ पल हँसाते हैं, कुछ रुलाते हैं तो कुछ अहसास दे जाते हैं ।दोस्ती ,प्यार,गम ,नफरत तो इसी के तो भाग हैं। किसी को अपना बनाना और उसी से धोखा खाना फिर भी नफरत न कर पाना ।कुछ पलों को भूलाना बहुत हीं मुश्किल होता है ।हम जानते हैं उन यादों को भूलाना हीं बेहतर है पर  न चाहते हुए भी ये दिल बरबस यादों के समंदर में गोता लगा जाता हैं ।

जिंदगी का कटु सत्य यह भी है अगर आप सच्चे दिल से भी किसी को चाहो तो कोई जरुरी नहीं कि वो भी आपको चाहे या अपना हो जाए ।किसी का ख्याल जान से ज्यादा रखनें को बावजूद भी धोखा मिले तो दिल में एक चुभन होना स्वाभाविक है ।किसी के नजरों प्यार मजाक में कह देने वाली बात होती है तो किसी का जुड़ाव भावनात्मक हो जाता है खैर अगर कोई इसे गंभीर लेता है तो यह उसकी गलती है ।
क्या प्यार सिर्फ जरुरतों तक सीमित रह गया है यह एक सवाल हीं है ।अहसास दर्द भरे हीं क्यों न हो ये हमें कुछ न कुछ सीख दे जाते हैं । 

   

Monday, July 9, 2012

कितने अजीब रिस्ते हैं यहां पर .....


मेरे अजीज मित्र नें एक बात कही थी कि नजरों से दूर दिल से दूर लेकिन मैं इससे सहमत नहीं था हालांकि ये बातें उसने मेरे लिए नहीं कही थी । पर शायद आज मैं भी इससे इत्तेफाक नहीं रख पा रहा । कभी दोस्ती और प्यार जैसे रिस्ते पवित्र माने जाते थे । जहां एक दूसरे के भावनाओं का कद्र करना बहुत हीं महत्व रखता था। कई कहानियों और कथाओं में भी इसका मिशाल दिया गया है । यह बंधन नहीं बल्कि मजाक मजाक में कह देनें वाली बात बन कर रह गया है । मैंने दिल से जुड़कर भी देख लिया जिसको भी दिल से चाहा उसने मेरे भावनाओं का मजाक बनाया।

मैनें रिस्तों को बहुत प्यार से निभाया पर
    कुछ लोगों ने इसे खुब भुनाया
    किसी नें हँसाया तो किसी ने खूब रुलाया
जिसने वादा किया जिंदगी भर दोस्ती निभानें का उसी ने गम दिया जमानें का ।
सच्चे रिस्तों को समझना भी बहुत मुश्किल होता है और ज्यादा जज्बाती होना भी अच्छा नहीं माना जाता है लेकिन जिंदगी में कुछ ऐसे रिस्ते होते हैं जिसे सच्चाई के साथ निभाना पड़ता है । ऐसा नहीं होता कि सभी लोग दर्द हीं दे कोई तो होगा जो हमारी भावनाओं को समझ सकेगा ।दोस्त हमारी जिंदगी के तमाम पहलुओं से अवगत होते हैं ।जब एक- दुसरे से बातें छुपायी जानें लगे तो रिस्तों के समाप्त होंने का समय आ जाता है ।कहीं न कहीं कमजोर हो रहे रिस्ते कि निशानी है ये ।

Monday, June 4, 2012

जिंदगी

                                     साभार -गूगल

जिंदगी एक दरिया है जिसमें गम तो मिलता हीं है प्यार भी मिलता है,
किसी का साथ तो मिलता हीं है पर तन्हाई भी मिलता है,
किसी को खुशी मिल जाती है जमानें भर की
और किसी को इसका एक कतरा भी नसीब नहीं होता !!!!


 जिंदगी से उम्मीद बहुत है हमें जानता हूँ उम्मीदों के सहारे जिंदगी अच्छी नहीं,
 कुछ पल के लिए हीं सही खुशी तो मिलती है !!!!

मेरी खामोशी

मैं तो दर्द के पलों मों भी खामोश रहता हूँ,
मजधार में भी किनारे के आस में रहता हूँ,
तन्हाई मिलती है अक्सर हमें फिर भी
न जानें क्यूँ खुशी की तलाश में रहता हूँ !!!!

Tuesday, February 21, 2012

बढ़ती चिंताऐं और शांति की खोज

                                                                          साभार - गूगल


भाग दौड़ भरी इस जीवन में आज सभी खुशियां 
का ताना बाना सभी बुन लेते हैं
लेकिन आज किसी को फुरसत कहां...
सभी अपने में जिंदगी को खोया हुआ पाते हैं इन परिस्थतियों मे समाजिकता से कट जाते हैं..
शांति की खोज में दर-दर भटकते लोग चाहे पैसा कितना भी क्यों न कमा लें उन्हें भौतिक सुखों का त्याग तो करना हीं पड़ता है
ऐसा कहा जाता है यदि हमारे  पास दुनिया का पूरा वैभव और सुख-साधन उपलब्ध है परंतु शांति नहीं है तो हम भी आम आदमी की तरह ही हैं। संसार में मनुष्यों द्वारा जितने भी कार्य अथवा उद्यम किए जा रहे हैं सबका एक ही उद्देश्य है  शांति ..आज हर कोई जानता है कि उसकी जिंदगी इस आर्थिक युग में काफी ब्यस्त हो गई है.....मन की उलझन और भावनाओं से अपने आप को रोक नहीं पाता है और संवेदनाओं के समंदर में उलझता चला जाता है...भीड़ में होते हुए भी वह अपनें आप को अकेला रखना चाहता है.. सिर्फ इसलिए क्योंकि वह अपने मन को शांत रख सकें.....