Monday, March 21, 2011

फुटपाथों पर गुजर रही जिंदगी जिनकी.........



" जिंदगी रैन  -बसेरे  के  सिवा  कुछ  भी  नहीं   ये  नफश  - उम्र  के  फेरे  के  सिवा  कुछ  भी  नहीं  
 दिल कभी शहरे सदरंग हुआ करता था अब तो उजड़े हुआ डेरे के  सिवा कुछ भी  नहीं "
                  
पाकिस्तानी शायर शेर अफजल जाफरी की ये पंक्तियाँ उन तमाम गरीबों के दर्द को बयां कर रही  है जो बंजारों का जीवन जीने को विवश है  .ये अपना  गुजर  -बसर  फुटपाथों  के किनारे  करते  है  ,चाहे  गर्मी का मौसम हो या  ठण्ड का इसकी  परवाह  इन्हें  नहीं है  ये जिंदगी जिए  जा  रहे  है .... सड़क  के किनारे  इनके  आशियाँ  होने  के कारण  कभी-  कभी दुर्घटनाओं  का  शिकार  होना  पड़ता  है  लेकिन  क्या  कर  सकते  हैं  ये गरीब  .सरकार द्वारा  कई  वायदे  किए  जाते  है  इनकी  दुर्दशा  सुधारने    के लिए    फिर  भी वायदों  का  क्या  नेता  इसे  हमेशा  की  तरह  भूल  जाते  हैं.....जहाँ एक ओर शहरों में  सफाई और स्वछता की बात की जाती है और अतिक्रमण हटाये जा रहे  हैं , लेकिन ये नहीं 
सोचा जाता की इन गरीबों का  क्या होगा.हालाँकि इनके  लिए  कई योजनाएं बनाई जाती है पर इनपर अमल कम ही होता है।  
                 

Thursday, February 24, 2011

आखिर कहाँ जाएँ भारतीय छात्र ............



उच्च  शिक्षा के लिए पलायन कर रहे भारतीय छात्र जहाँ  अपने  अच्छे भविष्य के लिए विकसित देशों का रुख करते है, इनकी प्राथमिकता अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देश होते हैं.विदेश जाने वाले विद्यार्थियों में ८१ प्रतिशत  का पसंदीदा  देश  अमेरिका  और ऑस्ट्रेलिया हैं . ज्ञातब्य है की मंदी के दौर में इन देशों की लडखडाती हुई अर्थब्य्वस्थाओं  में  इनका योगदान महत्वपूर्ण  रहा है ,इनपर हो रहे नस्लभेदी  टिपण्णी और रेडियो कौलर  जैसे मामले इनके दर्द को बयां करते है  इसके अलावे  कई तरह के दंश झेलते  हैं ये   छात्र !
                                              
ऑस्ट्रेलिया में नस्लभेदी  टिपण्णी  का बाद अमेरिका के  कैलिफोर्निया  में  ट्राई वैली नाम  के  फ़र्ज़ी विश्वविद्यालय  ने अपने कॉलेजों  में दाखिला  लेने वाले भारतीय छात्रों के पैरो  में बेड़ीनुमा रेडियो कौलर डाल दिए गए ताकि उनकी  गतिविधियों  की सुचना अमेरिकी   पुलिस को मिलती रहे .अमेरिका जहाँ विश्वपटल  पर मानव अधिकार की बात करता फिरता है और अपने ही देश में इसका खुला हनन कर  रहा है .अमेरिका ही नहीं बल्कि और भी  ऐसे देश है तमाम तरह  की  समस्याओं से जूझना पड़ता है .   भारत में अब मध्यमवर्गीय परिवार  का भी सपना होता है की हमारे बच्चे विदेशों से  शिक्षा ग्रहण करें  लेकिन इस तरह की घटनाएँ लोगो में डर पैदा कर देती हैं.

Sunday, January 9, 2011

आम आदमी ............महंगाई और भ्रष्टाचार




महंगाई और भ्रष्टाचार ...कौन जिम्मेदार. . . . . 


इस समय आदमी पर महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे इस कदर हावी है कि वह  विवश नजर आ रहा है। भ्रष्टाचार के मामले आने से राजनितिक भूचाल सा आ गया है पर इस पर कड़े कदम नहीं उठाये जा रहे है  भ्रष्टाचारियो  की काली  करतूत देश को बर्बाद करने पर तुली हुई है ।उनपर नकेल कसने  की सख्त जरुरत है। जहाँ  एक  ओर कमरतोड़ महंगाई ने लोगो का जीना हराम  कर दिया है वही दुसरी तरफ  नेता घोटालो में लिप्त पाए जा रहे है ।आम आदमी तमाम तरह के परेशानियों से त्रस्त है और उन्हें अपने खाने की फिक्र पड़ी है, और कुछ लोग ऐसे है जो घोटाले करने से बाज नहीं आते ,सबकी  जुबान से यही बातें आती है लेकिन गाँव से संसद तक सारे  वही लोग है जो भेडिये  की खाल  में छिपे बैठे है ये नहीं कहा जा सकता की कौन भ्रष्टाचारी  है और कौन ईमानदार सभी मौके की तलाश में है ,ईमानदारों और   भ्रष्टाचारियों  की  पहचान के  लिए कोई प्रयोगशाला  नहीं है जहां  इनकी पहचान हो सके, पकड़ में आ गए तो  भ्रष्टाचारी हैं नहीं पकडे गए तो  ईमानदार  हैं । भ्रष्टाचारी  यह कहते सुने जाते हैं की जिन्हें मौका नहीं नहीं मिला है वही ईमानदार हैं लेकिन जैसे ही उन्हें मौका मिलता है  भ्रष्टाचार  में चार चाँद लगा देते है। ब्यक्ति  भले ही ईमानदारी का नकाब पहनकर घूम रहा हो  लेकिन मौका मिलते ही उसके कदम बहकने लगते है खास वजह यह है की ईमानदार ब्यक्ति के  साये में घुमने वाले सिरफिरों की बात भी महत्वपूर्ण हो जाती है और न चाहते हुए  भी उसके कदम बहक जाते है. आम आदमी के मानसिकता और विचारो में जब तक परिवर्तन नहीं होगा तब तक इस पर काबू पाना असंभव सा लगता है बहरहाल यहाँ  घट रही  भ्रष्टाचार की घटनाओं से सबक लेने की जरुरत है।