Friday, September 13, 2013

मेरी जिंदगी भी कुछ ऐसी ही है

 वह पीपल का पेड़ !!!                     


अपनी जिंदगी भी उस पीपल की पेड़ की तरह दिखता है जो बाहर से तो हरा-भरा नजर आता है लेकिन अंदर से खोखला हो चला है ।मुझे याद है जब मैं छोटा था तो गांव के स्कूल में एक पीपल का पेड़ हुआ करता था जहां मैं पढ़ता था ।उस समय वह हरा-भरा हुआ करता था उसके छांव के नीचे मास्टर साहब पढ़ाया करते थे लेकिन दिन ढ़लने के साथ उसके स्थान में परिवर्त्तन होता रहता ।बारिश में छुपनें के लिए दूसरे क्लास में जाना पड़ता था।

सावन में तो उसके टहनियों पर झुले लगे होते थे लेकिन उसके खोखले होनें का राज कोई नहीं जानता था।वह वृक्ष बहुत दिनों तक लोगों को झेलता रहा पर किसी को अपना राज नहीं बताया और लोगों को छांव प्रदान करता रहा । पर्वों मे उसकी पूजा-अर्चना से वह बहुत खुश था कोई उसमे धागा बांधता तो कोई वहां अगरबत्तियां जलाता ।

मानो तो देव नहीं तो पत्थर वाली कहावत यहां भी चरितार्थ होती है ।आखिर अंत में उसे अपना राज खोलना हीं पड़ा पर वह क्या करता लोगों से तंग आकर यह बताना हीं पड़ा ।वह हार चुका था उसकी एक बड़ी सी टहनीं लोगों के झुले का शुकार बन गयी । अगरबत्तियों के कारण उसमें आग लग गयी और उसका एक भाग खोखला नजर आने लगा और सबको पता चल गया कि वह खोखला था।समय ने करवट ली और आंधियों ने उसे गिरा दिया क्योंकि उसका तना कमजोर था ,उसका नींव हीं खोखला था पर क्या करता वह अनवरत सेवा करता रहा,किसी को नहीं पता था वह कमजोर है पर उसकी दृढ़ शक्ति का परिणाम था कि वह खड़ा रहा ।

आज वहां समतल मैदान के सिव कुछ भी नहीं उसकी नामोनिशान तक मिट गया अब वहां न तो छांव है और न हीं पूजा स्थल ।जिस पेड़ ने कभी लोगों को छांव प्रदान किया वहां अब कुछ भी नहीं लोगों ने नया पेड़ ढ़ूंढ़ लिया और वो भी उनकी सेवा करता रहेगा ।अजीब बात है अपनी जिंदगी की कुछ पहलु की समानता उस पेड़ से हो ही सकती है । है न !

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Monday, August 5, 2013

रिश्तों में धोखा और दरकते रिस्तों की हकीकत...

कुछ रिश्तों को  जिंदगी भर निभाने का वादा और कसम दिलाकर साथ-साथ जिंदगी में अच्छा संबंध बरकरार रखनें का सिलसिला आज समाप्त होता जा रहा है। रिश्तों को देखकर तो ऐसा लगता है मानो कोई प्यार करने वाला फरिस्ता आसमां से आ टपका हो पर ये कितना सच्चा है ये तो वक्त ही बताता है ।

 संबंधों में शहद सा मिठास एक दिन फीका पड़ जाता है भला ये कौन जानता है । एकतरफा संबंध भला कैसे जिंदगी भर साथ रहता है ।अच्छे संबंधों की चाहत न जानें क्यों अंधेरे की ओर रूख कर हीं जाती है अगला ब्यक्ति यह नहीं समझ पाता की कोई उसके लिए कितना खास बस उसे जिंदगी भर के लिए जख्म दे ही जाता है ,हो सकता है वो समझ नहीं पाए पर समय किसी के अहम होंने का अहसास जरूर दिलाती है । किसी के द्वारा झूठे अपनापन ,धोखा दर्द देते हैं जो दिल के एक कोने में सिसकता रहता है उसके पास यही सवाल होते हैं क्या किसी को धोखा देने के लिए मैं हीं था ?


क्या रिश्ते मनोरंजन का साधन बन गये हैं जो मन बहलाए और किसी का फायदा निकल जाए तो बस उसकी जिंदगी से बाहर निकल जाए ।झूठे संबंध जिंदगी में धीमे जहर का काम करते है ,लोगों को अवसाद ग्रसित करते हैं । रिश्ते  सच्चाई से   निभाये जाएं तो जिंदगी जन्नत से कम नहीं ।

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Tuesday, January 8, 2013

यादों के साये में जिंदगी का धुंधलापन

यादें हीं याद आती हैं !!!!!!!!!!


कहते हैं यादें जिंदगी  के अहम् हिस्सों में से एक है पर कभी- कभी यादें गहरे जख्म को ताजा कर देती हैं .ये सही  भी है ।वक्त कब किस ओर और कहाँ ले जाएगा ये कौन जानता है ? हर कोई अच्छी जिंदगी के बारे में हीं सोचता है पर भला वक्त और यादों पर किसका वश होता है ।यादें हंसाती हैं भी हैं और रुलाती भी।यादें सपनें की तरह होते हैं जो कई पहलुओं को पल भर में छू जाते हैं ।


आजकल मेरे मन में दुविधाओं का सैलाब उमड़ पड़ा है । एक अजीब सा बदलाव महसूस कर रहा हूँ । शायद अकेलेपन की आदत पड़ती जा रही है । कितना अंतर हो गया है पहले और आज में । मैं परिस्थतियों को संभालने की कोशिश कर रहा हूँ। मेरी इन परिस्थितयों से बहुत लोग नाराज होंगे पर क्या करुँ  किससे बताऊँ समझ में नही आता पर समझेगा कौन अपनी परेशानियों को बतानें से क्या फायदा ये सभी प्रश्न मन को विचलित करते हैं। मैं कुछ यादों से उबरना चाहता हूँ जो अच्छी भी हैं बूरी भी। हर परेशानियों को अपने से उबरना पड़ता है हाँ सही भी है कुछ लोग इसे पागलपन भी कह सकते हैं पर अपनी मन: स्थिति को किसी ब्यक्ति से ज्यादा कौन जान सकता है यूँ तो बदलाव के कई कारण भी हो सकते हैं। मैं चाह कर भी कई पलों को नहीं भूल नहीं सकता फिर भी कोशिश करनें में भला क्या हर्ज है ।जिंदगी में कई ऐसे मौके आए जिनके तरफ हम बरबस हीं खींचे चले जाते हैं ।समझ में नहीं आता यादों में जिंदगी है या जिंदगी में यादें !