वह पीपल का पेड़ !!!
अपनी जिंदगी भी उस पीपल की
पेड़ की तरह दिखता है जो बाहर से तो हरा-भरा नजर आता है लेकिन अंदर से खोखला हो
चला है ।मुझे याद है जब मैं छोटा था तो गांव के स्कूल में एक पीपल का पेड़ हुआ
करता था जहां मैं पढ़ता था ।उस समय वह हरा-भरा हुआ करता था उसके छांव के नीचे
मास्टर साहब पढ़ाया करते थे लेकिन दिन ढ़लने के साथ उसके स्थान में परिवर्त्तन
होता रहता ।बारिश में छुपनें के लिए दूसरे क्लास में जाना पड़ता था।
सावन में तो उसके टहनियों पर झुले लगे होते थे लेकिन उसके खोखले होनें का राज कोई नहीं जानता था।वह वृक्ष बहुत दिनों तक लोगों को झेलता रहा पर किसी को अपना राज नहीं बताया और लोगों को छांव प्रदान करता रहा । पर्वों मे उसकी पूजा-अर्चना से वह बहुत खुश था कोई उसमे धागा बांधता तो कोई वहां अगरबत्तियां जलाता ।
मानो तो देव नहीं तो पत्थर वाली कहावत यहां भी चरितार्थ होती है ।आखिर अंत में उसे अपना राज खोलना हीं पड़ा पर वह क्या करता लोगों से तंग आकर यह बताना हीं पड़ा ।वह हार चुका था उसकी एक बड़ी सी टहनीं लोगों के झुले का शुकार बन गयी । अगरबत्तियों के कारण उसमें आग लग गयी और उसका एक भाग खोखला नजर आने लगा और सबको पता चल गया कि वह खोखला था।समय ने करवट ली और आंधियों ने उसे गिरा दिया क्योंकि उसका तना कमजोर था ,उसका नींव हीं खोखला था पर क्या करता वह अनवरत सेवा करता रहा,किसी को नहीं पता था वह कमजोर है पर उसकी दृढ़ शक्ति का परिणाम था कि वह खड़ा रहा ।
आज वहां समतल मैदान के सिव कुछ भी नहीं उसकी नामोनिशान तक मिट गया अब वहां न तो छांव है और न हीं पूजा स्थल ।जिस पेड़ ने कभी लोगों को छांव प्रदान किया वहां अब कुछ भी नहीं लोगों ने नया पेड़ ढ़ूंढ़ लिया और वो भी उनकी सेवा करता रहेगा ।अजीब बात है अपनी जिंदगी की कुछ पहलु की समानता उस पेड़ से हो ही सकती है । है न !
my life#happiness#broken#heart#inspiration
सावन में तो उसके टहनियों पर झुले लगे होते थे लेकिन उसके खोखले होनें का राज कोई नहीं जानता था।वह वृक्ष बहुत दिनों तक लोगों को झेलता रहा पर किसी को अपना राज नहीं बताया और लोगों को छांव प्रदान करता रहा । पर्वों मे उसकी पूजा-अर्चना से वह बहुत खुश था कोई उसमे धागा बांधता तो कोई वहां अगरबत्तियां जलाता ।
मानो तो देव नहीं तो पत्थर वाली कहावत यहां भी चरितार्थ होती है ।आखिर अंत में उसे अपना राज खोलना हीं पड़ा पर वह क्या करता लोगों से तंग आकर यह बताना हीं पड़ा ।वह हार चुका था उसकी एक बड़ी सी टहनीं लोगों के झुले का शुकार बन गयी । अगरबत्तियों के कारण उसमें आग लग गयी और उसका एक भाग खोखला नजर आने लगा और सबको पता चल गया कि वह खोखला था।समय ने करवट ली और आंधियों ने उसे गिरा दिया क्योंकि उसका तना कमजोर था ,उसका नींव हीं खोखला था पर क्या करता वह अनवरत सेवा करता रहा,किसी को नहीं पता था वह कमजोर है पर उसकी दृढ़ शक्ति का परिणाम था कि वह खड़ा रहा ।
आज वहां समतल मैदान के सिव कुछ भी नहीं उसकी नामोनिशान तक मिट गया अब वहां न तो छांव है और न हीं पूजा स्थल ।जिस पेड़ ने कभी लोगों को छांव प्रदान किया वहां अब कुछ भी नहीं लोगों ने नया पेड़ ढ़ूंढ़ लिया और वो भी उनकी सेवा करता रहेगा ।अजीब बात है अपनी जिंदगी की कुछ पहलु की समानता उस पेड़ से हो ही सकती है । है न !
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