Sunday, January 9, 2011

आम आदमी ............महंगाई और भ्रष्टाचार




महंगाई और भ्रष्टाचार ...कौन जिम्मेदार. . . . . 


इस समय आदमी पर महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे इस कदर हावी है कि वह  विवश नजर आ रहा है। भ्रष्टाचार के मामले आने से राजनितिक भूचाल सा आ गया है पर इस पर कड़े कदम नहीं उठाये जा रहे है  भ्रष्टाचारियो  की काली  करतूत देश को बर्बाद करने पर तुली हुई है ।उनपर नकेल कसने  की सख्त जरुरत है। जहाँ  एक  ओर कमरतोड़ महंगाई ने लोगो का जीना हराम  कर दिया है वही दुसरी तरफ  नेता घोटालो में लिप्त पाए जा रहे है ।आम आदमी तमाम तरह के परेशानियों से त्रस्त है और उन्हें अपने खाने की फिक्र पड़ी है, और कुछ लोग ऐसे है जो घोटाले करने से बाज नहीं आते ,सबकी  जुबान से यही बातें आती है लेकिन गाँव से संसद तक सारे  वही लोग है जो भेडिये  की खाल  में छिपे बैठे है ये नहीं कहा जा सकता की कौन भ्रष्टाचारी  है और कौन ईमानदार सभी मौके की तलाश में है ,ईमानदारों और   भ्रष्टाचारियों  की  पहचान के  लिए कोई प्रयोगशाला  नहीं है जहां  इनकी पहचान हो सके, पकड़ में आ गए तो  भ्रष्टाचारी हैं नहीं पकडे गए तो  ईमानदार  हैं । भ्रष्टाचारी  यह कहते सुने जाते हैं की जिन्हें मौका नहीं नहीं मिला है वही ईमानदार हैं लेकिन जैसे ही उन्हें मौका मिलता है  भ्रष्टाचार  में चार चाँद लगा देते है। ब्यक्ति  भले ही ईमानदारी का नकाब पहनकर घूम रहा हो  लेकिन मौका मिलते ही उसके कदम बहकने लगते है खास वजह यह है की ईमानदार ब्यक्ति के  साये में घुमने वाले सिरफिरों की बात भी महत्वपूर्ण हो जाती है और न चाहते हुए  भी उसके कदम बहक जाते है. आम आदमी के मानसिकता और विचारो में जब तक परिवर्तन नहीं होगा तब तक इस पर काबू पाना असंभव सा लगता है बहरहाल यहाँ  घट रही  भ्रष्टाचार की घटनाओं से सबक लेने की जरुरत है।



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