Monday, November 5, 2012

OMG !!!!!!!!!!! आस्था का ये कैसा आडंबर..........




आस्था में सच्चाई होती है ये मैं नहीं जानता, क्योंकि मैं कर्म पर विश्वास करता हूँ खैर जिस भगवान का आस्तित्व हीं नहीं उसे हम मुर्तियों में ढ़ूँढते  हैं आखिर क्यों धर्म के पाखंडियों को बढावा दिया जाता है ? जिस पर हमारा भरोसा नहीं होता हम मन्नते मांगते फिरते हैं अगर मन्नते पूरी तो भगवान ने कर दिया और पूरी नहीं किया तो किसी दूसरे भगवान के दरवाजे पर दस्तक देते हैं ।कहीं न कहीं हम उनकी पुजा ड़र से करते हैं मेरे साथ बुरा न हो जाए।
जो किसी के साथ बुरा करते है और भगवान से दुआ करते हैं कि वो उनके गलतियों को माफ़ कर दे ,पर ये कैसा भगवान है कि माफ कर दे
कहीं लोग मर रहे हैं और आसमान से फुलों की बारिश किया जाए यह कैसा इंसाफ ।कहीं बम धमाकों में हजारों लोग मरते हैं अगर भगवान होता तो चुपचाप नहीं देखता । इन प्रश्नों को ΟΗ ΜΥ God मूवी में बखूबी से  उठाया गया है . क्या भगवान  का फर्ज इतना ही है कि वे  सिर्फ देखते रहें  यहाँ इंसानियत का गला घोटा जा रहा है।आस्था के नाम पर लोगों को मुर्ख बनाने वाले बाबा  लाखों का ब्यवसाय करते नजर आते हैं .

OH My God  Plese अगर तुम जिंदा हो तेरा आस्तित्व है तो इंसाफ करो !!

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