Tuesday, February 21, 2012

बढ़ती चिंताऐं और शांति की खोज

                                                                          साभार - गूगल


भाग दौड़ भरी इस जीवन में आज सभी खुशियां 
का ताना बाना सभी बुन लेते हैं
लेकिन आज किसी को फुरसत कहां...
सभी अपने में जिंदगी को खोया हुआ पाते हैं इन परिस्थतियों मे समाजिकता से कट जाते हैं..
शांति की खोज में दर-दर भटकते लोग चाहे पैसा कितना भी क्यों न कमा लें उन्हें भौतिक सुखों का त्याग तो करना हीं पड़ता है
ऐसा कहा जाता है यदि हमारे  पास दुनिया का पूरा वैभव और सुख-साधन उपलब्ध है परंतु शांति नहीं है तो हम भी आम आदमी की तरह ही हैं। संसार में मनुष्यों द्वारा जितने भी कार्य अथवा उद्यम किए जा रहे हैं सबका एक ही उद्देश्य है  शांति ..आज हर कोई जानता है कि उसकी जिंदगी इस आर्थिक युग में काफी ब्यस्त हो गई है.....मन की उलझन और भावनाओं से अपने आप को रोक नहीं पाता है और संवेदनाओं के समंदर में उलझता चला जाता है...भीड़ में होते हुए भी वह अपनें आप को अकेला रखना चाहता है.. सिर्फ इसलिए क्योंकि वह अपने मन को शांत रख सकें.....





No comments:

Post a Comment